क्या आप जानते हैं कि मूंग और मोठ कम पानी में भी अच्छी उपज दे सकते हैं?
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान जैसे सूखे और कम वर्षा वाले इलाकों में मूंग और मोठ की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। यह दालें न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, बल्कि गर्मी और सूखे को भी सहन कर सकती हैं।
अगर आप इन फसलों की खेती करना चाहते हैं, तो सही बुआई का समय और खेती के तरीके जानना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में मूंग और मोठ की कब और कैसे बुआई करें ताकि अच्छी उपज मिले।
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में मूंग और मोठ की खेती: क्या हैं चुनौतियाँ?
✅ कम वर्षा और अधिक तापमान सहने की क्षमता।
✅ जल्दी तैयार होने वाली फसल (60-70 दिन में तैयार)।
✅ कम उर्वरक और पानी में अच्छी उपज।
✅ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार।
लेकिन सही समय पर बुआई और उचित खेती प्रबंधन करना आवश्यक है।
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में मूंग और मोठ की बुआई का सही समय
1. ग्रीष्मकालीन बुआई (मार्च-अप्रैल, सिंचित क्षेत्र में)
मूंग और मोठ को मार्च के मध्य से अप्रैल के अंत तक बोया जा सकता है, अगर सिंचाई की सुविधा हो।
इस समय बुआई करने से फसल 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है और खरीफ फसलों के लिए खेत खाली हो जाता है।
यह गर्मी और सूखे को सहन कर सकते हैं, लेकिन सिंचाई जरूरी होती है।
2. खरीफ बुआई (जुलाई-अगस्त, वर्षा आधारित खेती)
खरीफ मौसम में बारिश शुरू होते ही जुलाई से अगस्त तक बुआई कर सकते हैं।
यह बुआई बिना सिंचाई वाली जमीन (बांरानी खेती) के लिए उपयुक्त होती है।
फसल अक्टूबर-नवंबर तक पककर तैयार हो जाती है।
✅ अगर अच्छी बारिश हो जाए तो उत्पादन अधिक हो सकता है।
मूंग और मोठ की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी बातें
1. मिट्टी का चयन
रेतीली और बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
मिट्टी का pH 6.5-7.5 के बीच होना चाहिए।
अगर मिट्टी बहुत हल्की हो, तो गोबर की खाद मिलाकर सुधार करें।
2. बीज की मात्रा और बुआई का तरीका
मूंग: 8-10 किग्रा/हेक्टेयर
मोठ: 10-12 किग्रा/हेक्टेयर
कतार से कतार की दूरी: 30-40 सेमी।
बीज की गहराई: 3-4 सेमी।
3. उपयुक्त किस्में (बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के लिए)
मूंग की किस्में:
RMG 492 (जल्दी पकने वाली किस्म, 60 दिन में तैयार)
RMG 62 (सूखे में भी अच्छी उपज)
GM 4 (अच्छी उत्पादन क्षमता)
मोठ की किस्में:
RMO 225 (जल्दी पकने वाली)
RMO 40 (अच्छी उपज देने वाली किस्म)
CAZRI Moth 2 (कम पानी में भी अच्छा उत्पादन)
4. उर्वरक और पोषण प्रबंधन
बुआई से पहले 5 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
नाइट्रोजन (N): 20-25 किग्रा/हेक्टेयर।
फास्फोरस (P): 40-50 किग्रा/हेक्टेयर।
पोटाश (K): 20 किग्रा/हेक्टेयर।
5. सिंचाई प्रबंधन (बिना सिंचाई के कैसे उगाएं?)
अगर बारिश न हो, तो बुआई से पहले हल्की सिंचाई करें।
फूल आने और दाना बनने के समय थोड़ी नमी की जरूरत होती है।
मल्चिंग तकनीक अपनाकर मिट्टी की नमी को बनाए रखा जा सकता है।
6. कीट और रोग नियंत्रण
जड़ गलन रोग (Root Rot) से बचाव के लिए बीज को थायरम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें।
फली छेदक कीट से बचने के लिए नीम तेल या जैविक कीटनाशक का छिड़काव करें।
फसल कटाई और उपज
60-70 दिनों में फसल पककर तैयार हो जाती है।
जब पत्तियां पीली हो जाएं और फलियां सूख जाएं, तो फसल काट लें।
औसत उपज:
मूंग: 8-10 क्विंटल/हेक्टेयर।
मोठ: 6-8 क्विंटल/हेक्टेयर।
मूंग और मोठ की खेती क्यों फायदेमंद है?
✅ कम लागत में अच्छी उपज।
✅ जल्दी तैयार होने वाली फसल।
✅ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक।
✅ दालों की बाजार में हमेशा मांग रहती है।
अगर आप बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में रहते हैं और कम पानी में खेती करना चाहते हैं, तो मूंग और मोठ सबसे बेहतर विकल्प हैं।
क्या आप मूंग और मोठ की खेती करेंगे?
अगर हां, तो अपने अनुभव हमें कमेंट में बताएं!
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