क्या आप जानते हैं कि गर्मियों में भी बाजरा उगाया जा सकता है?
राजस्थान में बाजरा पारंपरिक रूप से खरीफ (बरसात) मौसम में बोया जाता है, लेकिन उन्हालू बाजरा (समर पर्ल मिलेट) गर्मियों में भी उगाया जा सकता है। खासकर बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान जैसे सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में यह एक अच्छा विकल्प है।
अगर आप गर्मी के मौसम में बिना सिंचाई वाली जमीन (बांरानी क्षेत्र) में बाजरा उगाना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपकी मदद करेगा।
बांरानी जमीन और उन्हालू बाजरा की खेती: क्या हैं चुनौतियाँ?
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान की मिट्टी रेतीली होती है, बारिश कम होती है और गर्मी तेज होती है। लेकिन उन्हालू बाजरा ऐसी फसल है जो:
✅ कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है।
✅ ज्यादा गर्मी सहन कर सकती है।
✅ जल्दी तैयार हो जाती है (60-75 दिन में)।
लेकिन सही समय पर बुआई और उपयुक्त खेती के तरीकों का पालन करना जरूरी है।
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में उन्हालू बाजरा की बुआई का सही समय
1. गर्मी में बुआई (फरवरी - अप्रैल)
बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में फरवरी के मध्य से अप्रैल के अंत तक उन्हालू बाजरा बोना सबसे उपयुक्त समय है।
इस समय तापमान 20-35°C के बीच रहता है, जो अंकुरण और फसल की शुरुआती बढ़त के लिए आदर्श होता है।
समय पर बुआई करने से बाजरा 60-75 दिनों में पक जाता है और मई-जून तक कटाई के लिए तैयार हो जाता है।
2. खरीफ में बुआई (जुलाई - अगस्त, बरसात में भी उगाया जा सकता है)
अगर सिंचाई की थोड़ी सुविधा हो या हल्की बारिश मिले, तो उन्हालू बाजरा को जुलाई-अगस्त में खरीफ फसल की तरह भी उगाया जा सकता है।
लेकिन गर्मियों में उगाने का फायदा यह है कि खरीफ बाजरे से पहले ही कटाई हो जाती है और किसान दूसरी फसल उगा सकते हैं।
बांरानी जमीन में उन्हालू बाजरा की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी बातें
1. मिट्टी का चयन
रेतीली और बालू-दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
मिट्टी का pH 6.5-7.5 के बीच होना चाहिए।
अगर मिट्टी बहुत हल्की है, तो गोबर की खाद मिलाकर सुधार किया जा सकता है।
2. बीज की मात्रा और बुआई का तरीका
बीज दर: 3-4 किलोग्राम प्रति एकड़।
बुआई का तरीका:
i. छिटकवां विधि (Broadcasting) – अगर बारिश का भरोसा न हो।
ii. कतारों में बुआई (Row Planting) – पौधों को सही पोषण मिलता है।
कतार से कतार की दूरी: 30-40 सेमी।
बीज की गहराई: 2-3 सेमी।
3. उपयुक्त बाजरा की किस्में (बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के लिए)
Raj 171 (उन्हालू बाजरा के लिए उपयुक्त)
MH 169 (जल्दी पकने वाली किस्म)
HHB 67 (कम पानी में भी अच्छी उपज देती है)
4. उर्वरक और पोषण प्रबंधन
बुआई से पहले 5-6 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालें।
नाइट्रोजन (N) – 20-30 किग्रा/हेक्टेयर।
फास्फोरस (P) – 40-50 किग्रा/हेक्टेयर।
सल्फर (S) – 15-20 किग्रा/हेक्टेयर (फसल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए)।
5. सिंचाई प्रबंधन (बिना सिंचाई के कैसे उगाएं?)
अगर बारिश कम हो, तो बुआई से पहले हल्की सिंचाई करें।
बाजरा अंकुरण और फूल आने के समय थोड़ी नमी की जरूरत होती है, इसलिए मल्चिंग (सूखी घास या फसल अवशेष बिछाना) करें, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे।
6. कीट और रोग नियंत्रण
जड़ गलन रोग (Root Rot) से बचाव के लिए बीज को थायरम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें।
तना मक्खी (Stem Borer) से बचने के लिए नीम तेल या जैविक कीटनाशक का छिड़काव करें।
फसल कटाई और उपज
60-75 दिनों में बाजरा पककर तैयार हो जाता है।
जब बालियाँ सुनहरी रंग की हो जाएं, तो फसल काट लें।
औसत उपज: 800-1200 किग्रा/हेक्टेयर।
क्या उन्हालू बाजरा की खेती लाभदायक है?
✅ कम लागत में अच्छी उपज मिलती है।
✅ गर्मियों में खाली खेत का उपयोग हो सकता है।
✅ पशु चारे के लिए भी उपयोगी है।
✅ बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
अगर आप बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान में रहते हैं और बिना सिंचाई के खेती करना चाहते हैं, तो उन्हालू बाजरा एक बेहतरीन विकल्प है।
क्या आप उन्हालू बाजरा की खेती करेंगे?
अगर हां, तो अपने अनुभव हमें कमेंट में बताएं!
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