प्याज की खेती कब करें , कैसे करें विस्तार से।
प्याज भोजन का मुख्य अंग है तृप्ति का अनुभव करवाने वाले स्वाद के अलावा इसमें कई औषधीय गुण भी है। वर्ष 2021-22 में भारत ने 378 मिलयन डॉलर के प्याज का निर्यात किया था और यह पिछले साल की तुलना में 22% अधिक था। हालांकि भारत का प्याज निर्यात कम हो कर 15.37 लाख टन पर आ गया है , लेकिन पिछले साल में विश्व में चल रहे युद्ध के परिणाम स्वरूप भारत में उगे उत्पाद विश्व में महँगे बेचे जा रहें हैं।
हमारे देश में प्याज की उत्पादकता 12 टन प्रति हैक्टेयर है जो की पश्चिमी देशों की तुलना में कम है। इसलिए उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीकी विकास और प्रशिक्षण की जरूरत है।
कब उगायें प्याज ?
प्याज रबी और खरीफ दोनों की मौसम में होता है। पर आज हम रबी के प्याज फसल की चर्चा करेंगे।
प्याज जमीन से लेने के समय जल्दबाजी न करें:
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि प्याज उखाड़ने का उचित और उत्तम समय मई में होता है तथा इसे उखाड़ने के 15-16 दिन पहले से ही सिंचाई बंद कर देनी चाहिए, ताकि प्याज में तनाव आए और पत्तियां सूखने लगे। इसे हल्के हाथ से उखाड़ने के लिए खेत मे इस प्रकार से पार्शव पक्ष में पटकनी देनी चाहिए कि एक प्याज की कतार पर दूसरी कतार के प्याज की पत्तियां ढकने के रूप में जाएं। इससे प्याज एकदम से नहीं सूखेगा।
पौध रोपाई से पहले खेत तैयार करें:
नर्सरी में पौध तैयार होने के साथ ही खेत को भी तैयार कर लेना चाहिए। मिट्टी की सम्पूर्ण जांच के बाद रोपाई से तीस दिन पहले 25 से 30 टन गोबर की खाद प्रति हैक्टेयर की दर से डाल कर जुताई कर लें। मिट्टी में ऑर्गैनिक खाद की मात्रा यदि 4 से 6 इंच के मध्य हो तो इस फसल के लिए सर्वोत्तम रहता है।
दूसरी जुताई के समय 400 किलो जिप्सम प्रति हैक्टेयर की दर से डालें। इसके बाद रोपाई के तीन-चार दिन पहले जुताई करें।
ध्यान रहे की दूसरी बार जोतने के साथ ही 50 किलो नाइट्रोजन, फास्फोरस भी 50 किलो और पोटाश को 100 किलो की मात्रा मे खेत में डालें। शेष 50 किलो नाइट्रोजन रोपाई के 30 दिन बाद डालें।
प्याज की रोपाई कैसे करें : नर्सरी में पौध 7 या 8 सप्ताह में तैयार हो जाती है। नर्सरीमें पौध तैयार होने के बाद दिसंबर के अंत समय के दरमियान पौध रोपाई शुरू कर देनी चाहिए, यह काम मध्य जनवरी से पूर्व हो जाना चाहिए। यह समय और तापमान प्याज के लिए उत्तम रहता है।
नर्सरी से प्याज के पौध को उखाड़ने से थोड़ी हल्की सिंचाई करनी चाहिए ऐसा करने से पौधों को आसानी से निकाला जा सकता है, जड़े भी नहीं टूटती।
नर्सरी से निकालने के बाद पौधे की 1/3 पत्तियों को काट लेना चाहिए।
लगाने से पूर्व उपचार:
पौध लगाने से पूर्व खेत में:
बुवाई वाले स्थान पर सड़े हुए गोबर की खाद को ट्राइको डर्मा और एजेटोबेक्टर के 200 ग्राम के एक-एक पैकेट मिलाकर बुवाई वाले स्थान पर डाल दें। इससे फफूंद नहीं होगी और बढ़वार भी ठीक होगी।
नर्सरी मे लगाने से पूर्व बीजोंका उपचार करें:
2 ग्राम थाइरम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारिता किया जाना चाहिए। आद्र गलन से बचने के लिए यह जरूरी है, ताकि पौध गले नहीं।
नर्सरी में लगाने के बाद खेत में लगाते समय:
गुलाबी जड़ सड़न रोग से बचाने के लिए पौधों को बावस्टीन या कार्बनडेजिम 1 ग्राम/ लीटर की दर से बड़े बर्तन अथवा किसी टब आदि में भरकर रखे और उसमें पौधों को डुबो- डुबो कर रोपते जाएं। रोपाई एकदम सीधी कतार में करें और एक कतार से दूसरी के बीच में 10-15 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी होनी चाहिए।
पौध खेत में लगा लेने के बाद:
पौधोंको कीट वाली बीमारी होने पर एक मिली लीटर मेटासिस्टोक्स एक लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। इसी प्रकार अगर फफूंद हों तो दो ग्राम मेन्कोजेब या एम-45 दो ग्राम प्रति लीटर को घोल बनाकर छिड़कें।
प्याज की किस्म और उनकी विशेषताएं:
आर.ओ.59: यह लाल रंग का होता है और स्वाद तीखा। इसे लंबे समय तक भंडारण किया जा सकता है।
आर.ओ.-1 यह पीला होता है और यह थोड़ा मीठा होता है। जयपुर, सीकर आदि जिलों में इसका उत्पादन बहुतायत में होता है। इसे तुरंत काम लेना जरूरी होता है।
एग्रीफाउंड लाइटरेड : जैसा की नाम से विदित है, हल्का लाल और स्वाद में हल्का तीखापन होता है। इसको लंबे समय तक भंडारण किया जा सकता है।
Tamesis agrobase के डायरेक्टर रवि राय पुरोहित बताते हैं की प्याज की बुवाई आमतौर पर नवंबर के अंतिम सप्ताह में की जाती है। बुवाई नर्सरी में की जाती है। एक हैक्टेयर खेत के लिए पौध तैयार करने के लिए 1000 से 1200 वर्ग मीटर में बुवाई की जानी चाहिए। एक हैक्टेयर खेत के लिए 8 से 10 किलो बीज की जरूरत होती है।
एक वर्ग मीटर में लगभग 10 ग्राम बीज डालना चाहिए। बुवाई के बीजों को कतार में डालना चाहिए। इसमें कतार से कतार की दूरी पाँच सेमी और बीज से बीज की दूरी दो तीन सेमी गहराई दो से ढाई सेमी होनी चाहिए। इसे मिट्टी से ढका जा सकता है।
इसके तत्काल बाद में या एक-दो दिन बाद फव्वारा अथवा ड्रिप से सिंचाई की जा सकती है। इस स्थान को घास फूस डालकर ढक दें, जिससे पक्षीयों से बचाव हो सकें।
अंकुरण के बाद पौध के सीधा खड़ा होने पर नेट हटा दें।
प्याज में रोग एवं कीट नियंत्रण का उपाय:
प्याज में अनेक रोग तथा कीट लग सकतें हैं जिनमे प्रमुख है-
- कटुवा सूँडी या कट वर्म: यह एक रात्रिचर कीट है, इसका रंग मटमैला भूरा होता है, यह पौधों को जमीन की सतह से काट देता है जिस से वे गिर कर मर जाते हैं।
यदि इस कीट की पहले आपके खेत में समस्या आई हुई है तो उपचार के रूप में पौध रोपण से पहले कार्बो फ्यूरॉन 1 किलोग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टर के हिसाब से डालें, यदि रोपण के पश्चात इस कीट का प्रकोप है तो क्लोपायरीफॉस 20 ई-सी नामक दवाई 2 मिलिलिटर प्रति लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।
- थरीपस कीट: पत्तियों का रस चूसने वाले यह जीव पीले और भूरे रंग के होते है, इनके नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 ईसी 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर में मिलाकर 2 से 3 छिड़काव 15 दिन के अंतराल में करें।
- शीर्ष भेदक कीट या हेलिकोवर्प की सूँडी: यह फूल अवस्था के पौध को नुकसान पहुंचाते हैं, इसकी पीठ पर धारियाँ पाई जाती है, इस कीट के कारण प्याज के पौध में बीज नहीं लग पाता। इस कीट के नियंत्रण के लिए नर सूँडी को आकर्षित करने वाले फेरमोन का प्रयोग करें, एच एन पी बी विषाणु की 300 एल ई मात्रा में 1 किलोग्राम गुड तथा 0.01 प्रतिशत इँदाट्रॉन 100 एक्स को 800 लीटर पानी में डाल कर 3 बार छिड़काव करना चाहिए। कीट का आक्रमण होने पर इंडोसल्फान 35 ई सी की 2 मिली लीटर दावा 1 लीटर पानी में डाल कर आवश्यकता अनुसार छिड़काव करें।
- सामान्य रोगों से सुरक्षा के लिए उच्च श्रेणी की बीज प्रयोग में लाए जाने उचित रहते हैं।
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